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मंथन

जब हम कभी एक व्यक्ति की तरह सोचते हैं तो हमारी विचार हमारी इर्द-गिर्द घूमती रहती है। हमें सिर्फ अपना ही स्वार्थ दिखाई पड़ता है किंतु यदि हम एक समूह की तरह अपना विचार रखें तो उसमें अपना हित दिखाई नहीं देता, अपना दुख भी महसूस नहीं होता और कभी अकेलापन महसूस नहीं होता।यह सच्चाई है। अगर आप अपने आप को सफल पाना चाहते हैं तो एक व्यक्ति की तरह नहीं अपने आपको एक समूह की तरह सोचे।

पिक्लू चंद

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