मंथन – एक बिचार

मंथन - एक विचार
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मंथन – एक बिचार

जब हम कभी एक व्यक्ति की तरह सोचते हैं तो हमारी विचार हमारी इर्द-गिर्द घूमती रहती है। हमें सिर्फ अपना ही स्वार्थ दिखाई पड़ता है किंतु यदि हम एक समूह की तरह अपना विचार रखें तो उसमें अपना हित दिखाई नहीं देता, अपना दुख भी महसूस नहीं होता और कभी अकेलापन महसूस नहीं होता।यह सच्चाई है। अगर आप अपने आप को सफल पाना चाहते हैं तो एक व्यक्ति की तरह नहीं अपने आपको एक समूह की तरह सोचे।

कभी कभी हम रूढ़िवादी विचारधारा के आवेश में आकर अपने अस्तित्व को संकट में डाल देते हैं। वास्तव में यह सोच कुछ क्षण के लिए हमारी कल्पना को भ्रमित कर देती है, हम आवेश बस अपना लक्ष्य से भ्रस्ट हो जाते हैं। जीवन में बहुमूल्य संपद हमारी गहन और विचार। किसी चीज का निष्कर्ष पाने के लिए हमें सदैव प्रयासरत होकर गहन और चिंतन करना चाहिए। अपने आप में ही आकलन करना चाहिए और सत्य की खोज करना चाहिए। हमारी अस्तित्व सत्य के साथ जुड़ा हुआ है। जब भी हम इसी सच्चाई से भ्रमित होते हैं हमारी अस्तित्व आखिरकार भयभीत होकर लक्ष्य से भटक जाता है। जीवन में अस्तित्व का महत्व जितना है उससे भी बढ़कर महत्व है जीवन में सत्य का। हमें सदैव सत्य से प्रेरित होकर वास्तविक आकलन के साथ गंतव्य की ओर प्रेरित होना चाहिए।

आपका दिन मंगलमय तथा शुभ हो।

पिक्लू चंद

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